प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी 14 अप्रैल को देहरादून इकोनामिक कॉरिडोर का शुभारम्भ करने जा रहे है। दिल्ली से देहरादून एक्सप्रेसवे से जहां एक तरफ दिल्ली देहरादून की दूरी कम होगी वहीं दूसरी तरफ इसके बनने से वन्य जीव एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी उत्तराखंड को सौगात मिलेगी। उत्तराखंड में विकास की गति के साथ-साथ पर्यावरण और वन्यजीवों को सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ी पहल की गई है। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के निर्माण को लेकर आज कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने प्रेस वार्ता की, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे यह प्रोजेक्ट देश में ‘इको-फ्रेंडली विकास’ का एक नया मॉडल पेश कर रहा है।
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर’ अब अपने अंतिम चरणों में है। लेकिन इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात इसकी रफ्तार नहीं, बल्कि वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदम हैं। इस कॉरिडोर से जुड़े पर्यावरणीय फायदों और संरक्षण की बात करें तो वन मंत्री उनियाल ने बताया कि राजाजी नेशनल पार्क और आस-पास के वन्य क्षेत्रों से गुजरने वाले इस कॉरिडोर के नीचे एलीफेंट अंडरपास और वाइल्डलाइफ कॉरिडोर बनाए गए हैं। इससे हाथी, हिरण और अन्य वन्यजीव बिना किसी खतरे के सड़क के नीचे से सुरक्षित आवाजाही कर सकेंगे। इतना हुआ नहीं निर्माण के दौरान जंगलों और पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को कम से कम नुकसान पहुँचाने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कॉरिडोर न केवल यात्रा का समय घटाएगा, बल्कि उत्तराखंड की आर्थिकी और पर्यटन को भी नए पंख देगा.
वन मंत्री सुबोध उनियाल का कहना है हमें विकास भी चाहिए और अपनी प्राकृतिक संपदा का संरक्षण भी। दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर इस बात का प्रमाण है कि हम वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में खलल डाले बिना भी आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर सकते हैं। इस प्रोजेक्ट जहाँ दिल्ली से देहरादून का सफर मात्र 2.5 से 3 घंटे में पूरा हो सकेगा। साथ ही, एशिया का सबसे बड़ा 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर भी इसी प्रोजेक्ट का हिस्सा है। सरकार का यह कदम भविष्य में ‘ग्रीन हाईवे’ के निर्माण के लिए एक मानक तय करेगा।
