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देहरादून मे शहर काजी मौलाना मोहम्मद अहमद कासमी के इंतकाल के बाद नये शहर काजी नियुक्त किये गए मुफ़्ती हसीम कासमी नियुक्ति को लेकर अब विवाद देखने को मिल रहा है। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड कि और से जामा मस्जिद कमेटी पलटन बाजार को एक आदेश जारी किया गया है जिसमें कमेटी के द्वारा नियुक्त किए गए शहर काजी मुफ़्ती हसीम कासमी कि नियुक्ति को निरस्त करने के लिए कहा गया है और साथ ही यह भी कहा गया है कि मौजूदा समिति जिसके द्वारा शहर का जी की नियुक्ति की गई है उसका कार्यकाल 2021 में समाप्त हो चुका है इसलिए वह शहर काजी की नियुक्ति नहीं कर सकती है और ना ही उसे समिति को किसी भी तरह की नियुक्ति करने का अधिकार है। साथ ही इस आदेश में यह भी कहा गया है कि शहर काजी की नियुक्ति के लिए किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति से कोई भी मशवरा नहीं किया गया है इसलिए शांति व्यवस्था भंग ना हो इसके लिए शहर का जी की नियुक्ति के लिए सभी जिम्मेदार लोगों को मिलकर फैसला लेना होगा।

वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स का कहना है कि पलटन बाजार जामा मस्जिद की समिति के द्वारा वक्फ बोर्ड को भी इसके बारे मे कोई जानकारी नहीं दी गई थी और शहर के जिम्मेदार लोग भी इसका एतराज कर रहे हैं। इसलिए मुफ्ती हसीम कासमी को हटाकर किसको शहर काजी बनाया जाये जिम्मेदार लोगों से मशवरा करने के बाद यह फैसला लिया जाना चाहिए।

दूसरी तरफ जामा मस्जिद पलटन बाजार कमेटी नसीम अहमद का कहना है कि शहर के जिम्मेदार लोगों से मशवरा करने के बाद और 1000 हजार से ज्यादा लोगों की राय लेने के बाद बाकायदा लोगों के हस्ताक्षर कराकर समिति ने मुफ्ती हासिम कासमी को यह जिम्मेदारी सौंपी है।

शहर काजी की नियुक्ति को लेकर हो रहे विवाद और राजनीति को लेकर शहर के मुस्लिम अधिवक्ता भी इस पर एतराज जता रहे हैं। उनका कहना है कि जामा मस्जिद पलटन बाजार कमेटी ने आम लोगों से मशवरे के बाद शहर काजी की नियुक्ति की है ऐसे में वक्फ बोर्ड अध्यक्ष को इस पर किसी तरह का विवाद नहीं करना चाहिए। अधिवक्ता अलमासुद्दीन सिद्दीकी, नसीम बेग, हसन मंसूर ने जामा मस्जिद में पहुंचकर नवनियुक्त शहर काजी मुफ़्ती हसीम कसमी को मुबारकबाद भी दी और कहा कि उनकी नियुक्ति जिम्मेदार लोगो के मशवरे के साथ कि गई है और यह दिनी मामला है लिहाजा इस मामले में किसी भी तरह की राजनीतिक दखल नहीं होनी चाहिए।

अधिवक्ता अलमाश सिद्दीकी ने कहा कि शहर काजी कौन होगा कौन नहीं होगा यह शहर के जिम्मेदार लोग तय करते हैं और वह लोग तय करते हैं जो मस्जिद में नमाज अदा करने के लिए आते हैं ऐसे में वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स को इस मामले में राजनीति नहीं करनी चाहिए और अगर मस्जिद के जिम्मेदार लोगों ने शहर काजी को नियुक्त कर दिया है तो उनको हटाना नहीं चाहिए यह एक गलत फैसला होगा। मुफ़्ती हसीम कासमी साहब एक नेक इंसान है और उन्होंने शहर काजी मोहम्मद अहमद कासमी के साथ रहकर मस्जिद मे इमामत भी कराई है और वह मस्जिद की तमाम तरतीबो को बखूबी जानते हैं और उन्होंने शहर काजी साहब से यह भी सीखा है कि अच्छा और बुरा क्या है और वह इसका फैसला ले सकते हैं। शादाब शम्स को इस मामले मे राजनीतिक दखलंदाजी नहीं करनी चाहिए यह दीन का मामला है वह इससे दूर रहे तो ही अच्छा होगा। इतना ही नहीं अधिवक्ता अलमास सिद्दीकी ने शादाब शम्स के मंसूबो पर सवाल उठाते हुए यह भी कहा कि आखिरकार शादाब इस मामले में क्यों दखलअंदाजी करना चाहते हैं और उनका मकसद क्या है यह शादाब शम्स को साफ करना चाहिए साथ ही उनको यह भी बताना चाहिए कि वह आखिरकार किसको शहर काजी बनवाना चाहते हैं और उन्हें मुफ्ती हासिम कासमी के शहर काजी बनने से आखिरकार क्यों ऐतराज़ है। इतना ही नहीं उनका यह भी कहना है कि अगर इस मामले में ज्यादा राजनीति हुई तो वह इस मामले को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाना से भी गुरेज नहीं करेंगे।

नव नियुक्त शहर काजी का प्रोग्रेसिव काम्युनिटी उत्तराखंड करेंगी सम्मान

एक तरफ जहां शहर काजी की नियुक्ति को लेकर विवाद चल रहा है और वक्फ बोर्ड उत्तराखंड में नियुक्ति को गलत बताया है वहीं दूसरी तरफ प्रोग्रेसिव कम्युनिटी ने मुफ्ती हसीम कासमी को शहर काजी बनाए जाने को लेकर मुबारकबाद दी है। प्रोग्रेसिव कम्युनिटी के जनरल सेक्रेटरी डॉक्टर जमशेद उस्मानी का कहना है शहर काजी के तौर पर एक नौजवान चेहरे को जिम्मेदारी दिए जाना बहुत ही काबिले तारीफ कदम है और मुफ़्ती हसीम कासमी तो पिछले लगभग 2 सालो से मस्जिद मे इमामत करा रहे थे और वह नेक इंसान है इसलिए उनका शहर काजी बनाये जाना अच्छा फैसला है इतना ही नहीं डॉक्टर जमशेद उस्मानी का यह भी कहना है कि प्रोग्रेसिव कम्युनिटी जल्द ही नव नियुक्त शहर काजी मुफ्ती हसीम कासमी के सम्मान में एक कार्यक्रम का भी आयोजन करने जा रही है जहां उन्हें एजाज से नवाजा जायेगा।

मुस्लिम सेवा संगठन ने भी नवनियुक्त शहर काजी कि नियुक्ति पर उठाये सवाल

शहर काजी की नियुक्ति को लेकर हो रहे विवाद में मुस्लिम सेवा संगठन ने भी नवनियुक्त शहर काजी मुफ्ती हसीम कासमी के शहर काजी बनाये जाने को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि नियुक्ति में सही प्रक्रिया नहीं अपनाई गई है इसलिए उनको हटाया जाना चाहिए और जिले भर के उलेमा इकराम मोजिज हजरात और जिम्मेदार लोगों की एक आम बैठक बुलाकर फैसला लिया जाना चाहिए तभी जाकर एक अच्छे शहर काजी का चुनाव किया जा सकता है।

अब देखना यह होगा कि शहर काजी कि नियुक्ति को लेकर बढ़ रहे इस विवाद का खात्मा कब होता है क्योंकि जहाँ एक तरफ कुछ संगठन मुफ्ती हसीम कासमी को शहर काजी बनाये जाने के पक्ष मे है और कुछ लोग इसका जमकर विरोध कर रहे है।

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