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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को UMEED पोर्टल पर वक्फ प्रॉपर्टी की जानकारी अपलोड करने की समय सीमा बढ़ाने का आदेश देने से मना कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वक्फ एक्ट कि धारा 3B ने वक्फ ट्रिब्यूनल को सही मामलों में समय सीमा बढ़ाने की शक्ति दी है. इसलिए इस पर आगे जो भी कार्यवाही होगी वो ट्रिब्यूनल कि ओर से ही होंगी। इस समस्या को लेकर आज नेशनल मुस्लिम एडवोकेट्स हेल्प फाउंडेशन के पदाधिकारी ने जिलाधिकारी देहरादून को एक ज्ञापन सोपा और अपनी समस्याएं बताई अधिवक्ताओं का कहना है कि उम्मीद पोर्टल लगातार खराब रहा जिसके कारण 6 महीनो में भी 20 फीसदी से अधिक संपत्तियों पोर्टल पर दर्ज नहीं हो पाई है इसलिए सरकार को इसमें समय बढ़ाना चाहिए ताकि वक्फ की सभी संपत्तियां दर्ज हो सके।

हलाकि अब इस फैसले के बाद उत्तराखंड मे वक्फ बोर्ड को भी खासी दिक्क़तो का सामना करना पड़ेगा क्योंकि अभी तक उत्तराखंड मे 20 फीसदी प्रॉपर्टी ही पोर्टल पर दर्ज हो पाई है। उत्तराखंड वक्त बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स से जब ये सवाल पूछा गया गया तो उनका कहना है कि उन्होंने इस समस्या को देखते हुए मुख्यमंत्री को चिठ्ठी लिखी है कि जल्द से जल्द ट्रिब्यूनल का गठन किया जाए ताकि उम्मीद पोर्टल की इस समस्या का भी समाधान किया जा सके।

गौर तलब है कि 6 जून को पोर्टल बनाया गया था, और नियम 3 जुलाई को बनाए गए थे, और वक्फ संशोधन एक्ट पर रोक लगाने की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला 15 सितंबर को आया था. उसके बाद एक्ट लागू किए जाने के बाद 6 महीने का समय उम्मीद पोर्टल पर संपत्तियां दर्ज करने के लिए दिया गया था और 5 दिसंबर तक का समय पोर्टल पर दर्ज करने का था लेकिन इस सबके बावजूद भी संपत्ति दर्ज नहीं हो पाई है।

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