देहरादून: भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) में शनिवार को आयोजित भव्य पासिंग आउट परेड (POP) के साथ ही देश-विदेश को नए सैन्य अधिकारी मिल गए हैं। देश की राष्ट्रपति और सशस्त्र सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने मुख्य अतिथि और समीक्षा अधिकारी के रूप में परेड की सलामी ली। इस दौरान राष्ट्रपति ने भारतीय सैन्य अकादमी के 158वें नियमित (Regular) और 141वें तकनीकी स्नातक पाठ्यक्रम (Technical Graduate Course) की पासिंग आउट परेड की समीक्षा की और नवप्रशिक्षित सैन्य अधिकारियों का हौसला बढ़ाया।

🌟 मुख्य आकर्षण: एक नजर मेंकुल भारतीय कैडेट्स: 481विदेशी मित्र देशों के कैडेट्स:
34 (16 विभिन्न देशों से)ऐतिहासिक पल:
9 महिला कैडेट्स ने सफलतापूर्वक पास आउट होकर रचा इतिहास।
मुख्य अतिथि: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू।विशिष्ट अतिथि: उत्तराखंड के राज्यपाल ले. जनरल (से.) गुरमीत सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।

🇮🇳 140 करोड़ भारतीयों के विश्वास के संरक्षक हैं आप:
राष्ट्रपतिअपने संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कैडेट्स में कर्तव्यनिष्ठा, समर्पण और राष्ट्रभक्ति का जोश भरा। उन्होंने कहा:”सैन्य अधिकारी केवल देश की सीमाओं के प्रहरी ही नहीं हैं, बल्कि वे 140 करोड़ भारतीयों के विश्वास, सम्मान और आकांक्षाओं के भी संरक्षक हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि आप सभी राष्ट्र की सुरक्षा, सम्मान और अखंडता की रक्षा में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।”उन्होंने बदलते वैश्विक परिदृश्य को देखते हुए युवा अधिकारियों से अग्रिम मोर्चे (Frontline) से नेतृत्व करने, उच्च नैतिक मूल्यों का पालन करने और सेना में तकनीकी नवाचार को अपनाने का आह्वान किया।

👩✈️ महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम
इस वर्ष की परेड आईएमए के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गई है। अकादमी के इतिहास में यह पहला मौका है जब 9 महिला कैडेट्स यहां से सफलतापूर्वक पास आउट होकर सेना में अधिकारी बनी हैं। यह मील का पत्थर भारत में ‘महिला-नेतृत्व वाले विकास’ (Women-led Development) और सशक्त भारत की संकल्पना को सीधे तौर पर प्रदर्शित करता है।

🌍 वैश्विक रक्षा सहयोग का सशक्त प्रतीक
भारतीय कैडेट्स के साथ कंधे से कंधा मिलाकर 16 मित्र देशों के 34 विदेशी कैडेट्स भी पास आउट हुए। राष्ट्रपति ने इसे भारत की वैश्विक मित्रता, आपसी विश्वास और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते रक्षा सहयोग का एक बेहतरीन उदाहरण बताया।

इन दिग्गजों की रही गरिमामई उपस्थितिइस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और आईएमए के समादेशक (Commandant) लेफ्टिनेंट जनरल नागेन्द्र सिंह सहित सेना और नागरिक प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी और कैडेट्स के गौरवान्वित परिजन मौजूद रहे।
