देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के बैरागीवाला और आसपास के क्षेत्रों में हाल ही में हुई हिंसा, तोड़फोड़ और कथित तौर पर सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे नफरत भरे बयानों (Hate Speech) को लेकर स्थानीय अधिवक्ताओं में भारी आक्रोश है।
सोमवार को अधिवक्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला मजिस्ट्रेट (DM) से मुलाकात कर एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से वकीलों ने प्रशासन से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और दोषियों के खिलाफ बिना किसी पक्षपात के सख्त से सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

शहर का सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश:
जिला मजिस्ट्रेट को सौंपे गए ज्ञापन में वकीलों ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि देहरादून हमेशा से अपनी शांति, आपसी भाईचारे और सौहार्दपूर्ण माहौल के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन पिछले कुछ दिनों में बैरागीवाला क्षेत्र में जो कुछ भी हुआ, वह बेहद निंदनीय है। प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि कुछ असामाजिक तत्व सोची-समझी साजिश के तहत शहर की शांति को भंग करने और लोगों के बीच तनाव पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं।

निष्पक्ष जांच और उपद्रवियों पर कड़े एक्शन की मांग
अधिवक्ताओं ने जिला प्रशासन से मांग की है कि:हिंसा और आगजनी की जांच:
बैरागीवाला में हुई हिंसा, आगजनी और सार्वजनिक व निजी संपत्तियों को पहुंचाए गए नुकसान की तुरंत एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए।

कानून हाथ में लेने वालों पर कार्रवाई: कोई भी व्यक्ति या संगठन कानून से ऊपर नहीं हो सकता। जो भी इस हिंसा के पीछे जिम्मेदार हैं, उन्हें चिन्हित कर जेल भेजा जाए।सोशल मीडिया पर पैनी नजर: इंटरनेट और सार्वजनिक मंचों पर भड़काऊ और नफरत फैलाने वाले बयानों (Hate Speech) को प्रसारित करने वालों पर तुरंत आईटी एक्ट और अन्य धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए जाएं, ताकि नागरिकों के मन से डर का माहौल खत्म हो सके।

प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल
ज्ञापन में वकीलों ने इस बात पर भी जोर दिया है कि घटना के वक्त प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की क्या भूमिका थी, इसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि किसी भी अधिकारी के स्तर पर लापरवाही, ढिलाई या किसी प्रकार का पक्षपात सामने आता है, तो उनके खिलाफ भी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

शांति व्यवस्था बहाली का भरोसा
प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई है कि जिला प्रशासन इस मामले की संवेदनशीलता को समझेगा और बिना किसी राजनीतिक या सामाजिक दबाव के निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। उन्होंने प्रभावित लोगों के लिए उचित सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की भी मांग की है।
